Hindi sample paper class 12, Study Guides, Projects, Research of Hindi

Hindi sample paper class 12 2025-26

Typology: Study Guides, Projects, Research

2022/2023

Uploaded on 01/14/2026

aryan-narwariya
aryan-narwariya 🇮🇳

4 documents

1 / 10

Toggle sidebar

This page cannot be seen from the preview

Don't miss anything!

bg1
: 3 : 80
:
:-
-
-
-
-
( )
1. - (10)
- - , ,
, -
, ; --
- - ,
, -
- ,
,
? - ,
, -
(i) - - ? (1)
)
)
)
)
(ii) - ? (1)
) -
)
)
)
[10]
Page 1 of 10
Class XII Session 2025-26
Subject - Hindi Core
Sample Question Paper - 1
pf3
pf4
pf5
pf8
pf9
pfa

Partial preview of the text

Download Hindi sample paper class 12 and more Study Guides, Projects, Research Hindi in PDF only on Docsity!

(i) जात - था िकस कार का म - िवभाजन है? (1)

(ii) जात - था का मुय दोष या है? (1)

[10]

(iii) िननलखत कथन पर िवचार कजए - (1)

कथन (I): जात-था मनुय को उसक च के अनुसार पेशा चुनने क वतंता देती है।

कथन (II): जात-था म पेशे का िनधारण माता-िपता के सामाजक तर के आधार पर होता है।

कथन (III): जात-था म पेशा परवतन क अनुमत नह होती।

कथन (IV): जात-था कुशल िमक और सम समाज का िनमाण करती है।

क) केवल कथन (I) और (III) सही ह।

ख) केवल कथन (II) और (III) सही ह।

ग) केवल कथन (I), (III) और (IV) सही ह।

घ) केवल कथन (II) और (IV) सही ह।

(iv) जात-था मनुय के पेशे का िनधारण िकस आधार पर करती है? (1)

(v) आधुिनक युग म जात-था य अनुपयु हो जाती है? (2)

(vi) जात-था से मनुय के पेशे को लेकर या समयाएँ उप होती ह? (2)

(vii) जात-था के सांत के अनुसार मनुय का पेशा कब से िनधारत हो जाता है? (2)

i. किवता के अनुसार , " तेरा जल मेरा मन है " इस पंि का या अथ है? (1)

I. देश का जल किव के भावनामक जीवन का िहसा है।

II. किव अपने देश के जल को पिव मानता है।

III. देश का जल केवल भौतक संसाधन है।

IV. किव देश के जल को बचाने का संकप लेता है।

क) कथन I और II सही ह।

ख) कथन I, II और IV सही ह।

ग) केवल कथन III सही है।

घ) कथन I और III सही ह।

ii. किव ने अपने देश को िकस कार क संा दी है? (1)

[8]

iv. बे िकसक याशा म हगे?

क) िवकप (iii) ख) िवकप (iv)

ग) िवकप (i) घ) िवकप (ii)

v. िदन कैसे ढलता है?

i. जदी-जदी

ii. धीरे-धीरे

iii. मंद गीत से

iv. आय से

7. िननलखत म से िकही दो के उर दीजये : [6]

i. छोटे चौकोने खेत को कागज़ का पा कहने म या अथ िनिहत है? [3]

ii. उहाँ राम लछमनिह िनहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी

[3]

iii. भाषा को सहूलयत से बरतने से या अभाय है? बात सीधी थी पर किवता के आधार पर बताइए। [3]

8. िननलखत म से िकही दो के उर दीजये : [4]

i. पतंग किवता म किव ने कृत का अनूठा चण िकया है। उसे अपने शद म तुत कजए। [2]

ii. अपािहज अपने दुख के बारे म य नह बता पाता? [2]

iii. याया कजए-

[2]

[5]

i. गांश के अनुसार जात-था म लेखक ने या दोष देखा है?

ii. मनुय को अपना पेशा बदलने क आवयकता िकस कारण पड़ती है?

iii. पेशा बदलने क वतंता के अभाव का या परणाम होता है?

क) कथन (A) तथा कारण (R) दोन गलत ह। ख) कथन (A) सही है लेिकन कारण (R) उसक

ग) कथन (A) गलत है लेिकन कारण (R) सही है। घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोन सही ह तथा

कारण (R) कथन (A) क सही याया करता

iv. िननलखत कथन (A) तथा कारण (R) को यानपूवक पिढ़ए। उसके बाद िदए गए िवकप म से कोई एक सही िवकप चुनकर

कथन (A): जात-था मनुय को एक पेशे से नह बाँधती है।

कारण (R): िहदू धम क जात-था कोई और पेशा नह चुनने देती है।

क) केवल ii ख) केवल i

ग) इनम से कोई नह घ) केवल iii

v. गांश के आधार पर िननलखत कथन पर िवचार कजए-

i. जात-था मनुय को एक ही पेशे से बाँध देती है।

ii. जात-था पेशे का पूविनधारण नह करती है।

iii. तकूल परथतय म भी मनुय को अपना पेशा बदलने क वतंता नह होनी चािहए।

10. िननलखत म से िकही दो के उर दीजये : [6]

i. पहलवान लुन के सुख-चैन भरे िदन का वणन अपने शद म कजए। [3]

ii. भिन ने महादेवी वमा के जीवन पर कैसे भािवत िकया? [3]

iii. हजारी साद िवेदी ने शरीष के सदभ म महामा गाँधी का मरण य िकया है? साय िनिपत कजए। [3]

11. िननलखत म से िकही दो के उर दीजये : [4]

i. लोभ के िवषय म लेखक जैन कुमार के या िवचार ह? [2]

ii. गगरी फूटी बैल िपयासा इंदर सेना के इस खेलगीत म बैल के यासा रहने क बात य मुखरत हुई है? [2]

iii. जात था को म-िवभाजन का ही एक प नह मानने के पीछे डॉ. आंबेडकर के तक का उेख कजए। [2]

12. िननलखत म से िकही दो के उर दीजये : [10]

i. कूली िदन क कौन-सी आदत यशोधर बाबू आज भी नह छोड़ पाए थे? यह आदत िकन मूय को बढ़ाने म सहायक थी? [5]

ii. किवता के त लगाव से पूव तथा उसके बाद अकेलेपन के त जूझ के लेखक क धारणा म या बदलाव आया और य?

[5]

iii. मुअनजोदड़ो क नगर योजना आज क सेटर-माका कॉलोिनय के नीरस िनयोजन क अपेा अधक रचनामक है-

[5]

  1. िनȣनǺलǺखत ɓʇʠ के उȇर दीʹजये: (2 X 4 = 8)
  2. िनȣनǺलǺखत ɓʇʠ मǻ से िकȝही दो के उȇर दीʹजये: (4 X 2 = 8)

खंड -( आरोह भाग - 2 एवं िवतान भाग -2 पाɱपुȭतकʠ के आधार पर )

मेहनत को ɓेȼरत करने वाला तșव संकȧपशिɝ या इȏछाशिɝ है। इ˃तहास साȈी है िक किठनाइयʠ का सामना अपने अदȣय साहस और अटूट िवʉास के बल पर िकया जा सकता है। Ȋयʠिक जंग हमेशा ताक़त से ही नहɀ बȥȧक ʹजगर और िहȣमत से भी जीती जाती है। इसǺलए कहा जाता है िक मन के हारे हार है और मन के जीते जीत।

(i) खोजपरक पɑकाȼरता, िवशेषीकृत पɑकाȼरता, वॉचडॉग पɑकाȼरता, एडवोकेसी पɑकाȼरता वैकȥȧपक पɑकाȼरता आिद। ȭवȏछता अʺभयान भारत के माननीय ɓधानमंɑी ȅी नरǻɒ मोदी ʀारा महाșमा गाँधी कɃ 145 वɀ जयंती के अवसर पर आरंभ िकया गया 'ȭवȏछ भारत अʺभयान’ अब तक का सबसे बड़ा ȭवȏछता अʺभयान है। गाँधीजी के 'ȥȊवट इं˃डया' आʑान को पूरा करने वाला देश अब उनके 'ɞɃन इं˃डया' के आʑान को पूरा करने िनकल पड़ा है। देश को ȭवȏछ बनाना ʹसफȁ िकसी सरकार या संगठन कɃ ʹजȣमेदारी नहɀ हो सकती, होनी संभव भी नहɀ है। जब तक देश के नागȼरक इसके ɓ˃त जागʖक नहɀ हʠगे, तब तक इस महान् लȷय को ɓाʂ करना संभव नहɀ है। हमǻ ȭवȏछता के महȶव को समझना होगा। इसके अभाव मǻ यानी गंदगी से होने वाले दुȬɓभावʠ को जानना होगा। िवʉ पटल पर बनी अपनी गंदगी कɃ छिव को िमटाकर अपनी ȭवȏछता-िɓय छिव को ȭथािपत करना होगा।

(ii)

सजग नागȼरक सजग नागȼरक का ताșपयȁ एक जागʖक नागȼरक से है। जागʖक अथाȁत् अपने पȼरवेश मǻ घिटत होने वाली सभी घटनाओं से न ʹसफȁ वह अȏछी तरह पȼर˃चत रहे, बȥȧक उन पȼरȥȭथ˃तयʠ मǻ अपने दा˃यșव के ɓ˃त भी अșयंत संवेदनशील और जागʖक रहे। देश, समाज, समुदाय, समूह, पȼरवार आिद के बारे मǻ सभी जानकाȼरयʠ को रखना तथा उनके ɓ˃त अपने दा˃यșवʠ को िनभाना ही एक सामाȝय नागȼरक को सजग नागȼरक बनाता है। सजगता का मतलब है, सदैव अलटȁ रहना। सजग Ȫयिɝ ही अपने सभी लȷयʠ को ɓाʂ कर सकता है। अपने लȷय को लेकर सजग रहने वाला Ȫयिɝ पूरी चैतȝयता के साथ उससे जुड़ जाता है। उसकɃ समȭत मानʹसक एवं शारीȼरक ऊजाȁ अपने लȷय को पाने मǻ लग जाती है।अपनी सजगता के कारण ही वो Ȫयिɝ अपने लȷयʠ को ɓाʂ करता है और अपने कामʠ को अȏछे से कर पाता है। एक सजग नागȼरक हमेशा अपने दा˃यșवʠ के ɓ˃त सचेत रहता है। वह ˄चतनशील एवं कमȁशील होता है। मनुȬय का सोचना एवं उसके अनुसार Ȫयवहार करना ग˃तशील जीवन कɃ पहचान है। एक सजग नागȼरक न केवल देश एवं समाज के ɓ˃त अपने दा˃यșवʠ का ईमानदारीपूवȁक िनवाȁह करता है, बȥȧक वह समाज के सभी सदȭयʠ कɃ बेहतरी के Ǻलए भी ˄च˃तत रहता है। उसकɃ सजगता ȭवयं के साथ-साथ अपने पूरे समाज को बेहतर िदशा कɃ ओर ले जाने के Ǻलए होती है। सजगता एक ऐसी ɓवृǺȇ है, ʹजसे मनुȬय अपने अंदर िवकʹसत करता है। यह कोई जȝमजात िवशेषता नहɀ होती, बȥȧक ȭवयं का समाजीकरण करते हुए अʷजत कɃ जाती है। सजगता वह मागȁ है, ʹजस पर चलकर मनुȬय अपने जीवन को एक नया अथȁ ɓदान करता है। यह मनुȬय कɃ बेहतर पहचान िनȺमत करता है। कोई भी समाज अपने सजग नागȼरकʠ के बल पर ही आगे बढ़ता है एवं िवकास करता है। िकसी िवशेष पȼरȥȭथ˃त मǻ भी अपनी ʹजȣमेदाȼरयʠ को उ˃चत ढंग से समझने वाला और उन ʹजȣमेदाȼरयʠ को िनभाने वाला नागȼरक ही एक सजग नागȼरक है। ɓșयेक समाज अपने िवकास के Ǻलए ऐसे ही नागȼरकʠ कɃ इȏछा रखता है।हर समाज मǻ Ȫयिɝयʠ का सजग होना िनतांत आवȫयक है।

(iii)

रे˃डयो नाटक के Ǻलए पाɑʠ कɃ संȋया सीिमत रखनी चािहए तािक उनकɃ आवाज़ और काम को Ȝयान से सȣपािदत िकया जा सके और ɓșयेक पाɑ को पयाȁʂ समय और महșव िदया जा सके। साथ ही, यह संȋया रे˃डयो के तकनीकɃ और सामɎी कɃ सीमाएँ को Ȝयान मǻ रखते हुए िनधाȁȼरत कɃ जाती है।

(iv)

िवशेष लेखन को सभी पाठक नहɀ पढ़ते, ɓșयेक िवषय का पाठक वगȁ अलग होता है जैसे समाचार पɑ मǻ कारोबार औए Ȫयापार का पʁा कम पाठक पढ़ते हǾ लेिकन जो पाठक पढ़ते है उनकɃ संȋया सामाȝय पाठकʠ से ȑयादा होती है और उनकɃ उȣमीद होती है िक उनको उनके िवषय कɃ ȑयादा से ȑयादा जानकारी मौजूदा समय के िहसाब से िमले।

(i)

समाचार लेखन मǻ छह ककार महșवपूणȁ हǾ - i. Ȋया : घटना Ȋया है? ii. कौन : घटना मǻ कौन शािमल हǾ? iii. कहाँ : घटना कहाँ हुई? iv. कब : घटना कब हुई? v. कैसे : घटना कैसे हुई? vi. Ȋयʠ : घटना Ȋयʠ हुई? समाचार लेखन मǻ ककारʠ का महȶव : ȭपʊता : छह ककारʠ का उपयोग करके Ǻलखे गए समाचार लेख ȭपʊ और सं˃Ȉʂ होते हǾ। पूणȁता : छह ककारʠ का उपयोग करके Ǻलखे गए समाचार लेख घटना के बारे मǻ सभी आवȫयक जानकारी ɓदान करते हǾ। सटीकता : छह ककारʠ का उपयोग करके Ǻलखे गए समाचार लेख घटना के बारे मǻ सटीक जानकारी ɓदान करते हǾ। िनȬपȈता : छह ककारʠ का उपयोग करके Ǻलखे गए समाचार लेख िनȬपȈ होते हǾ और िकसी भी पȈ का समथȁन नहɀ करते हǾ।

(ii)

संपादक के नाम पɑ संपादकɃय पृʋ पर ȭथायी ȭतंभ होते हǾ, ʹजसमǻ पाठकʠ के पɑ ɓकाʺशत होते हǾ। इसमǻ पाठक िवʺभʁ मुɹʠ पर अपनी राय Ȫयɝ करते हǾ और जन समȭयाओं को उठाते हǾ। इसके माȜयम से नए लेखकʠ के Ǻलए लेखन कɃ शुʖआत करने का अवसर िमलता है। इस ɓकार यह एक महȶवपूणȁ ȭतंभ है।

(iii)

  1. अनुȏछेद को Ȝयानपूवȁक पढ़कर िनȣनǺलǺखत ɓʇʠ के उȇर दीʹजये : बɧे ɓșयाशा मǻ हʠगे, नीड़ʠ से झाँक रहे हʠगे- यह Ȝयान परʠ मǻ ˃चिड़यʠ के भरता िकतनी चंचलता है? िदन जȧदी-जȧदी ढलता है?
  2. िनȣनǺलǺखत ɓʇʠ मǻ से िकȝही दो के उȇर दीʹजये:
  3. िनȣनǺलǺखत ɓʇʠ मǻ से िकȝही दो के उȇर दीʹजये:
  4. अनुȏछेद को Ȝयानपूवȁक पढ़कर िनȣनǺलǺखत ɓʇʠ के उȇर दीʹजये : जा˃त-ɓथा पेशे का दोषपूणȁ पूवȁ िनधाȁरण ही नहɀ करती, बȥȧक मनुȬय को जीवनभर के Ǻलए एक पेशे से बाँध भी देती है। भले ही पेशा अनुपयुɝ या अपयाȁʂ होने के कारण वह भूखा मर जाए। आधुिनक युग मǻ यह ȥȭथ˃त ɓायः आती है, Ȋयʠिक उɿोग-धंधʠ कɃ ɓिɌया व तकनीक मǻ िनरंतर िवकास और कभी-कभी

() ɓșयाशा Ȫयाȋया : ɓșयाशा

(i)

Ȫयाȋया : नीड़ʠ से

(ii)

Ȫयाȋया : चंचलता

(iii)

Ȫयाȋया : ˃चिड़यʠ कɃ

(iv)

() िवकȧप (i) Ȫयाȋया : जȧदी-जȧदी

(v)

किव अपने किव - कमȁ को िकसान के कृिष कमȁ जैसा ही बताता है। किव कहते हǾ िक मǾ भी एक ɓकार का िकसान हूँ। िकसान के खेत के समान उसके पास चौकोर कागज का पʁा है। जैसे िकसान जमीन पर बीज, खाद,जल डालता है उसी ɓकार मǾ कागज़ पर शȡद,भाव बोता हूँ। उसके बाद अनाज,फल - फूल कɃ तरह किवता पुȥȬपत पʅिवत होती है,इस ɓकार किव काȪय-रचना ʖपी खेती के Ǻलए कागज़ के पʁे को अपना चौकोना खेत कहते हǾ।

(i)

यह पंिɝयाँ मानव जीवन के मूȧयʠ का िववरण करती हǾ। ये पंिɝयाँ Ȫयिɝ को संयम, सɽाव, ȝयाय, धैयȁ, सामȚयȁ और साझा बंधुșव कɃ महșवपूणȁता ʹसखाती हǾ। इन गुणʠ के पालन से Ȫयिɝ संतुʊ, समȺपत और अनुशाʹसत जीवन जी सकता है जो सामाʹजक और मानिवकɃ समृ˃ɺ का आधार बनाता है।

(ii)

भाषा को सहूǺलयत से बरतने का आशय है- सीधी, सरल एवं सटीक भाषा के ɓयोग से है। भाव के अनुसार उपयुɝ भाषा का ɓयोग करने वाले लोग ही बात के धनी माने जाते हǾ। आडंबर रिहत, सरलता और िबना िकसी लाग - लपेट के कही गयी बात ȅोताओं एवं पाठकʠ दोनʠ को ɓभािवत करने मǻ सफल होती है।

(iii)

'पतंग' किवता मǻ ɓकृ˃त का ˃चɑण मनमोहक और जीवंत है। किव ने ɓकृ˃त के िवʺभʁ पहलुओं को बड़ी ही खूबसूरती से दशाȁया है। किव ने आकाश को "खुला नीला मैदान" के ʖप मǻ वʻणत िकया है, जो पतंगʠ के Ǻलए उड़ने का एक िवशाल ȭथान ɓदान करता है। हवा को "मȭत मौसम" के ʖप मǻ वʻणत िकया गया है, जो पतंगʠ को उड़ने मǻ मदद करती है। हवा कɃ ग˃त को "तेज" और "जोरदार" बताया गया है, जो पतंगʠ को ऊंचा उड़ने मǻ सȈम बनाती है। सूयȁ को "लाल सवेरा" के ʖप मǻ वʻणत िकया गया है, जो आकाश मǻ चमकता है और पतंगʠ को रंगʠ से भर देता है। धरती को "खुली धरती" के ʖप मǻ वʻणत िकया गया है, जो बɧʠ को पतंग उड़ाने के Ǻलए पयाȁʂ जगह ɓदान करती है। प˃Ȉयʠ को "पतंगʠ कɃ तरह" उड़ते हुए िदखाया गया है, जो ɓकृ˃त मǻ जीवंतता का एहसास कराते हǾ। बɧे पतंग उड़ाते हुए खुशी से झूम रहे हǾ, जो ɓकृ˃त के साथ उनके संबंध को दशाȁता है।

(i)

ɓʇकताȁ अपािहज से उसके िवकलांगपन व उससे संबं˃धत कʊʠ के बारे मǻ बार-बार पूछता है, परंतु अपािहज उनके उȇर नहɀ दे पाता। वाȭतिवकता यह है िक उसे अपािहजपन से उतना कʊ नहɀ है ʹजतना उसके कʊ को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। ɓʇकताȁ के ɓʇ भी अȭपʊ हǾ तथा ʹजतनी शीʙता से ɓʇकताȁ जवाब चाहता है, उतनी तीɘ मानʹसकता अपािहज कɃ नहɀ है। उसने इस कमी को ȭवीकार कर Ǻलया है तथा वह अपना ɓदशȁन नहɀ करना चाहता।

(ii)

Ȫयाȋया- ɓȭतुत पंिɝ मǻ किव पूँजीप˃तयʠ पर ȪयंȌय कर रहा है। उसके अनुसार पूँजीप˃त लोग ऊँची-ऊँची इमारतʠ मǻ रहते हǾ। ये सारी उɗ गरीबʠ, िकसानʠ तथा मज़दूरʠ पर अșयाचार करते हǾ तथा उनका शोषण करते हǾ। अतः उसके Ǻलए पूँजीप˃तयʠ के रहने के मकान नहɀ हǾ, ये आतंक भवन हǾ। ʹजनसे सारे अșयाचारʠ तथा शोषण का जȝम होता है। किव आगे कहता है िक लेिकन यह भी ȭमरणीय है िक Ɍां˃त का आगाज़ हमेशा गरीबʠ मǻ ही होता है। ये लोग ही शोषण का सबसे बड़ा ʺशकार होते हǾ। किव ने इȝहǻ जल ȟलावन कɃ संȉा दी है। वह कहता है िक Ɍां˃त ʖपी बाȼरश का पानी जब एकɑ होकर बहता है, तो वह कɃचड़ से युɝ पृȚवी को डूबो देने का सामȚयȁ रखता है। किव ने पूंजीप˃तयʠ को कɃचड़ तथा कɃ संȉा दी है, ʹजसे Ɍां˃त ʖपी जल-ȟलावन डूबो देता है। शोिषत वगȁ ɓșयेक पȼरȥȭथ˃त का मुकाबला करने कɃ ताकत रखता है।

(iii)

खालीपन, िनराशा एवं जीवन कɃ िनरथȁकता का ɿोतक है, जबिक सृजनशीलता, कमठȁता अथवा काम मǻ लगे होना जीवन के ɓ˃त आȭथा, आशा, आșम-िवʉास एवं पूणȁता का ɓतीक है। मुअनजो-दड़ो कɃ सड़कʠ और गǺलयʠ का िवȭतार खंडहरʠ को देखकर िकया जा सकता है। यहाँ हर सड़क सीधी है या िफर आड़ी। चबूतरे के पीछे ‘गढ़ उɧ वगȁ कɃ बȭती, महाकुंड, ȭनानागार, ढकɃ नाǺलयाँ, अʁ का कोठार, सभा भवन, घरʠ कɃ बनावट, भȪय राजɓासाद, समा˃धयाँ आिद संरचनाएँ ऐसे सुȪयवȥȭथत हǾ िक कहा जा सकता है िक शहर िनयोजन से लेकर सामाʹजक संबंधो तक मǻ इसकɃ कोई तुलना नहɀ है। वतȁमान कɃ सेȊटर-माकाȁ कॉलोिनयʠ मǻ आड़ा-सीधा िनयोजन बहुत िमलता है जो रहन-सहन को नीरस बनाता है तथा इसमǻ िनयोजन के नाम पर हमǻ अराजकता ȑयादा हाथ लगती है। अतः कहा जा सकता है कɃ आज कɃ सेȊटर-माकाȁ कॉलोिनयां इनके सामने िबलकुल फɃकɃ हǾ।

(iii)